अपनी सोच का शब्दों से श्रृंगार करें और फिर बाँटें अपने विचर और दूसरे से लें. कितना आसन है उन सबसे लड़ना जो हमें दुश्वार लगते हैं. कोई दिशा आप दें और कोई हम दें 'वसुधैव कुटुम्बकम' कि सूक्ति सार्थक हो जायेगी.
सोमवार, 31 मार्च 2014
मंगलवार, 20 अगस्त 2013
शुक्रवार, 9 अगस्त 2013
बुधवार, 10 जुलाई 2013
रविवार, 7 जुलाई 2013
मंगलवार, 23 अप्रैल 2013