अपनी सोच का शब्दों से श्रृंगार करें और फिर बाँटें अपने विचर और दूसरे से लें. कितना आसन है उन सबसे लड़ना जो हमें दुश्वार लगते हैं. कोई दिशा आप दें और कोई हम दें 'वसुधैव कुटुम्बकम' कि सूक्ति सार्थक हो जायेगी.
शुक्रवार, 12 मार्च 2010
बुधवार, 10 मार्च 2010
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010
शनिवार, 26 दिसंबर 2009
गुरुवार, 3 दिसंबर 2009
बुधवार, 25 नवंबर 2009