अपनी सोच का शब्दों से श्रृंगार करें और फिर बाँटें अपने विचर और दूसरे से लें. कितना आसन है उन सबसे लड़ना जो हमें दुश्वार लगते हैं. कोई दिशा आप दें और कोई हम दें 'वसुधैव कुटुम्बकम' कि सूक्ति सार्थक हो जायेगी.
गुरुवार, 30 सितंबर 2010
शनिवार, 11 सितंबर 2010
मंगलवार, 13 जुलाई 2010
मंगलवार, 15 जून 2010
मंगलवार, 8 जून 2010
सोमवार, 17 मई 2010