अपनी सोच का शब्दों से श्रृंगार करें और फिर बाँटें अपने विचर और दूसरे से लें. कितना आसन है उन सबसे लड़ना जो हमें दुश्वार लगते हैं. कोई दिशा आप दें और कोई हम दें 'वसुधैव कुटुम्बकम' कि सूक्ति सार्थक हो जायेगी.
सोमवार, 28 मई 2018
शनिवार, 12 मार्च 2016
बुधवार, 21 अक्टूबर 2015
गुरुवार, 1 जनवरी 2015
गुरुवार, 15 मई 2014
मंगलवार, 6 मई 2014