अपनी सोच का शब्दों से श्रृंगार करें और फिर बाँटें अपने विचर और दूसरे से लें. कितना आसन है उन सबसे लड़ना जो हमें दुश्वार लगते हैं. कोई दिशा आप दें और कोई हम दें 'वसुधैव कुटुम्बकम' कि सूक्ति सार्थक हो जायेगी.
रविवार, 3 अप्रैल 2011
सोमवार, 28 फ़रवरी 2011
बुधवार, 16 फ़रवरी 2011
बुधवार, 9 फ़रवरी 2011
मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011
शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010