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मंगलवार, 20 अगस्त 2013

सफल आई ए एस बनने के गुर !

                           हमारे देश में प्रतिभाशाली युवा अपनी मेधा को अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगा देते हैं . वह मंजिल भी इतनी आसन नहीं होती है . रात दिन के कठिन परिश्रम करके वह आई ए एस/पी सी एस बनने का सपना पूरा कर पाते हैं लेकिन फिर भी उनकी मेहनत कितनी सफल हुई ?  इसके लिए बहुत सारी कसौटियों पर उन्हें  खरा उतरना होता है और वह भी लोगों के पद , सम्बन्ध सभी के अनुरूप सबके लिए खरा उतरने के लिए उन्हें कुछ और  पढाई करनी होगी .  वह  पढाई करते हैं चयन के लिए और चयनित होने के बाद -- अपने काम को सफलतापूर्वक करने के बारे में उन्हें कोई सयाना आदमी बताने वाला नहीं होता है सो उनके रास्ते में ढेर सारे पत्थर पड़े होते हैं और उन्हें ठोकर भी नहीं मार सकते हैं और अगर मारने की कोशिश करें भी तो कभी कभी वे खुद ही घायल हो जाते हैं .अपने पद पर रहते हुए निर्विवाद रूप से कार्य करते हुए निरंतर तन, मन , धन और पद पर अपना स्थायित्व  बनाये रख सकें . बस यही चूक हो जाती है . जिन्हें अपनी मेधा पर विश्वास होता है और वे उसका अवसर के अनुरूप प्रयोग कर लेते हैं  और वे पद पर रहते हुए यश लाभ , धन लाभ और पद लाभ सभी का पूरा पूरा आनंद उठाते हैं . लेकिन जो तैयारी  के साथ ये अवसरवादिता और 'यस सर' के पाठ को सिर्फ सरसरी निगाह से देख भर लेते हैं और आगे बढ जाते हैं . बस वही जो चयनित हो जाए  तो वे अपने पद पर जाने से पहले कुछ गुर हमसे सीख लें तो 200 प्रतिशत सफलता की गारंटी और जरा सी भी चूक हो तो पूरे  पैसे वापस करने की गारंटी . इसके लिए उन्हें पद पर रहकर समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं बल्कि वे परिणाम आने के बीच के समय में हमसे संपर्क कर गुर सीख सकते हैं . इस कोचिंग के ज्वाइन करने के बाद मजाल है कि  किसी भी नजर से आप असफल हो जाएँ बल्कि अपने सेवाकाल में किसी भी तरीके से बालबांका भी नहीं हो सकता है . 
                      चलिए कोचिंग तो बाद में शुरू करेंगे कुछ बिंदु तो  हम उजागर कर ही सकते हैं . सांकेतिक जानकारी आतंरिक विषय को उजागर करने के लिए पर्याप्त होती है --

१. सांसद/विधायक  / सांसद* पति / सांसद पत्नी / सांसद पुत्र/ सांसद पुत्री / सांसद दामाद / सांसद साले आदि आदि रिश्तों के अतिरिक्त उनके चमचों की बात को वेदवाक्य मानकर अपने पद की गरिमा बचाए रखने में सहायक होगा . *सांसद के साथ विधायक भी पढ़ा जाय 
२. दलों के स्वयमभू / पुत्र / पुत्री / पुत्रवधू / दामाद/ खानदानी या मुंहबोले चमचों के सामने नजरें झुकाकर बात करें . उनके चरण स्पर्श करने का गुण विक्सित कर लें तो सोने पे सुहागा . 

३. सांसद / विधायक और उनसे जुड़े सभी मान्यवर के आदेश पर सिर्फ 'यस सर' ही बोले , सुनने की शक्ति विकसित कर लें ताकि फटकार जैसी चीजों से दो चार न होना पडे . 

४. इमानदारी , कर्तव्यपरायणता / न्यायप्रियता / पदनिष्ठा जैसे अवगुणों को सदैव दबा कर रखें अगर न रख सकें तो सत्येन्द्र दुबे और मंजुनाथ जैसे अफसरों की याद कर लें . 

५. भ्रष्टाचार जो पूरे देश के शक्तिशाली हाथ वालों की रगों में खून बनकर बह रहा है , अपने खून में शामिल कर पायें या नहीं उसे देख कर अनदेखा करना सीख लें या फिर जहाँ वे कहें वहां पर चिड़िया बिठा दें , सुखी रहेंगे . 

६. जिनके ऊपर दबंगों का हाथ हो उनसे उलझने की कोशिश न ही करें नहीं तो पद की बात छोडिये , आपके जीवन की गारंटी पीरियड बिना किसी नोटिस के ख़त्म किया जा सकता है . 

                                ये तो कुछ पॉइंट हैं - इनसे जुड़े बहुत सारे मुद्दे पढाई के दौरान समझाये जायेंगे . जो भी सुधिजन इसको पढ़ें कृपया भावी नौकरशाहों तक जरूर पहुंचा दें .



   

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

पापा को गए 22 साल हुए !

                                  आज 10 अगस्त को पापा को  हमसे दूर गए हुए 22 साल हो गए . लेकिन  क्या कभी वे हमारी यादों से दूर हुए शायद कभी नहीं क्योंकि जनक वो थे हमारे .   अपने सारे   संस्कार , विचार और जीवनचर्या को पूरी पूरी तरह से हमको दे कर गए हैं .
                                 उन्होंने कभी अपने और अपनी जरूरतों को सामने प्राथमिकता  नहीं  दी थी . जबकि एक दुनियांदार इंसान  के लिए ये बहुत जरूरी होता है . किसी भी जरूरतमंद को देखा तो वे कभी न नहीं कर पाते थे .   कई बार हुआ कि पापा खेती जुता कर गाँव से पैसे लेकर आये और जोतने वाला रोने  लगा तो पैसे  छोड़ कर ही चले आये और घर में सब लोग उनको  कहने लगते कि इतने दयालु बनने की क्या जरूरत है ? लेकिन नहीं जरूरतमंद अगर उनके पास पैसे हुए और अगर माँगने लगा तो बगैर कुछ सोचे अपनी जरूरत को न देखते हुए उसको दे देते . भले भी फिर वो कभी न मिला हो .
                                   उनके उस गुण को हम भाई  बहन ने भी ग्रहण किया , ग्रहण क्यों  वह तो हमें विरासत में मिला और इस बात का आज के  समय में लोग नाजायज फायदा भी उठा लेते हैं लेकिन कुछ गुण ऐसे होते हैं की धोखा खाकर भी इंसान बदल नहीं पाता है. शायद उनके  रास्ते  पर चलकर हम उनके प्रति अपने सच्चे मन से कृतज्ञता ज्ञापित कर पाते है . उन्हें मेरा शत शत नमन और श्रद्धांजलि .