शनिवार, 13 अक्तूबर 2012

अधूरे सपनों की कसक (6)

                           हम लोग जिन्होंने अपने जीवन के इतने दशक जी लिए हैं जितने कि  शेष नहीं है और हम आज भी अपने उन अधूरे सपनों की कसक नहीं भूल पाए हैं लेकिन  आज की युवा पीढी भी तो इस दंश को 
उसी शिद्दत से जी रही है। क्योंकि मन वही है और संवेदनाएं भी वही है। उम्र से इसमें कोई फर्क नहीं आता है। 
इस कड़ी में युवा कवी सत्यम शिवम अपने संस्मरण से अवगत करा रहे हैं।





सपने ही तो है जो जीने की वजह देते है।शायद सच में अगर ये सपने ना होते तो भला किसको पूरा करने के लिये हम रात के घनघोर अंधेरों को चीर कर फिरसुबह की अलसायी धुन पर जागते और हर रोज अपने लक्ष्य की ओर एक-एक कदम बढ़ाते रहते हैं । इस दुनिया में बस सपने ही हमे वो मुकाम दिखलाते है जहां हम खुद को जो चाहे वो बना सकते है।सपनों को देखने के लिये हर व्यक्ति स्वतंत्र है और सपनों में वो खुद को देश का राष्ट्रपति भी बना सकता है।झूठा ही सही पर यथार्थ का एक अनोखा स्वांग रचती  है यह स्वप्न  नगरी।सपनों की वो दुनिया जहां बस हम होते है और होती है हमारी लालसाएं,अतृप्त इच्छाएं  और ना जाने जिंदगी के कितने वैसे फलसफे जो हमे हर पल जीने के लिये प्रेरित करते रहते है।

      मै शायद आज उम्र के उस पडाव पर हूँ जहां मै खुद को युवा कह सकता

हूँ।बचपन की मासूमियत से निकलकर अभी तुरंत ही संघर्ष के नये धरातल परमैने पावं रखे है।मै शुरु से काफी महत्वकांक्षी रहा हूँ।नींद के सपने तो दूर  मै तो जागती आँखों से भी कई बार स्वप्न देखता रहता  हूँ। जानते है क्यूं?क्योंकि मै बस उस तात्कालिक हर्ष से अपने सारे वर्तमान,भूत के विषादों को भूल जाता हूँ और ऐसा लगता है सामने स्वर्णिम भविष्य बाहें पसारे मुझे आमंत्रित कर रहा है स्वयं में विलीन   होने को।पर अगले ही पल जब आँखे खुलती है तो आभास होता है सच्चाई का और मेरे नींद के कारवां के मुसाफिर मुझसे काफी दूर  चले जाते है।मै दौड़ना चाहता हूँ उनके पीछे पर शायद मेरी विवशताएं  मुझे रोक देती है और मै फिर अपनी पलकों के सिरहाने कही स्वप्नों  को छुपा कर अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त हो जाता हूँ।पर फिर जब भी उस दौर से गुजरता हूँ जहां मेरे सपने मेरी खातिर प्रतीक्षारत होते है।मै भागदौड़  भरी जिंदगी के सारे थकानों को भूलाकर बड़ी ही सुकुन की साँस लेता हूँ उन सपनों के साथ।ऐसे है मेरे सपने,जो मुझे दर्द नहीं देते बस हमेशा मुझे आने वाले कल की एक अनोखी झलक देते है।

          अब तक की मेरी छोटी जिंदगी में कई अधूरे सपने भी है जो मन में कही टीस सा  पैदा करते है,क्योंकि वे अपूर्ण है।मै असफल रहा उन्हें मँजिल तक पहुँचा पाने में इसकी कसक आज भी दिल के किसी कोने में दफन  है जो मेरी असमर्थता व विवशता की ओर इंगित करती है।मेरे जीवन के अधूरे सपने बस दो चीजों से जुड़े है एक कैरियर व दूसरा मोहब्बत। क्योंकि इन दोनों के लिये मैने स्वप्न देखे और कुछ को पूरा कर सका और कुछ अधूरे रह गये...जो आज भी मेरे एहसासों के उस अंधेरे कमरे में एक तस्वीर बन कर टंगे है जिसपर अब धुल जम गया है।मै शुरु से पढ़ाई में एक होनहार छात्र था।मैने हाई स्कूल में काफी मेहनत की और यहां तक की अपने जिला स्कूल में टाप भी आया पर एक कसक तब भी मन में रह  गयी।मेरी शुरु से इच्छा थी कि  मै ८० प्रतिशत मार्क्स के साथ मैट्रिकुलेसन पूरा करुँ।जिससे पटना साइंस कालेज या किसी बेहतरीन कालेज में मेरा दाखिला हो सके।पर बस १० नम्बरों के अभाव ने मुझे इससे वंचित कर दिया।मै अव्वल होकर भी खुद को सबसे निचले पायदान पर देखने लगा।मेरे सपने अधूरे रह गये और मै अपने शहर मोतिहारी के ही प्रतिष्ठित महाविद्यालय  से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने लगा।यहां भी मेरा लक्ष्य कुछ अच्छा करने का ही था और मैने अपने टूटे सपनों की मरम्मत की।मै पूरे जिले में अव्वल आया बहुत ही अच्छे नम्बरों के साथ।मेरी पिछली कसक मेरी इस सफलता में कही दब सी गयी और मै हर दिन कुछ नये सपनों को दिल में पाले आगे बढ़ता रहा।मै भी और लड़कों की तरह आई.आई.टी व एन.आई.टी जैसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कालेजों से स्नातक करना चाहता था।पर यहां फिर भाग्य ने मुझे मात दे दिया।मेरी तैयारी बखूबी होने के बावजूद भी घरवालों से अलगाव व मेरी दादी के देहावसान ने मुझे पूरी तरह तोड़ दिया और मै कई मानसिक बीमारियों  का
शिकार हो गया।डाक्टर ने मुझे ३ महीने की बेड रेस्ट को कहा और चौथे महीने मेरी इंजीनियरींग की सारी परीक्षाएं थी.जिनपर मेरे कैरियर का एक टर्निंग प्वाइंट केंद्रित था। मै असफल हो गया पर ये असफलता मेरे अधूरे सपनों की कसक नहीं थी।कसक तो यह थी कि मै आई.आई.टी में बस एक सब्जेक्ट में क्वालीफाइ नहीं हो पाया था और मेरे सपने टूट गये थे।पर शायद भगवान को कुछ और ही मँजूर था।मैने ए.आई.ई.ई.ई में अच्छे रैंक्स पाये थे और मेरा दाखिला वि.आई.टी में हो गया।मेरी गाड़ी फिर सामान्य सी अपने पटरी पर दौड़ने लगी।

      मै फिर सपने देखने लगा और अब मेरे सपनों में कुछ विशेष ही रोचकता थी।मै अपने स्वप्नों में अपनी स्वप्नसुंदरी को ढ़ूँढ़ने लगा।जो गलत नहीं था यह तो बस इस उम्र का असर था।पर मुझे ये नहीं पता था कि इन सपनों के टूटने का दर्द कुछ ज्यादा ही हो सकता है क्योंकि ये दिल से जुड़े मुद्दे थे।मै न चाह कर भी उस समंदर की गहराई में डूबता गया।मेरी हर दिन एक नये एहसास के साथ शुरु होती और हर रात बस यह उम्मीद कि शायद कल वो मेरा होगा।मेरी प्रेम कहानी कुछ अलग थी,सबसे जुदा थी।जहां ना था कोई सामिप्य और ना ही कोई अलगाव।वह हर पल मेरे साथ थी मेरे सपनों की दुनिया में।मै खुश था सपनों को अपने करीब अपने हमसफर के रुप में पाकर।सब कुछ सामान्य सा बढ़ा जा रहा था।अचानक मेरी जिंदगी में एक तूफान सा आया और उसने बस मुझे ही नहीं मेरे सपनों को मेरे संवेदनाओं को और मेरे दिल सबको तोड़कर,झकझोर कर रख
दिया।मै शांत हो गया...बहुत शांत.......एक घनघोर चुप्पी...जो शायद तूफान के बाद की होती है।मै अब ख्वाब नहीं देखता था।मै अब कुछ भी नहीं सोचता था।क्योंकि मेरे मुकद्दर ने मेरे सबसे सुहाने सपने को मुझसे छीन लिया था और मुझे उदास कर दिया था।इस अधूरे सपने की कसक अब कभी खत्म होने वाली नहीं थी और मै अब अपनी जिंदगी में प्रैक्टीकल होना चाहता था।मेरी इंजीनियरींग खत्म हो चुकी थी और मै अब देश के एक बहुत बड़े मल्टीनेशनल कम्पनी में साफ्टवेयर इंजीनियर के रुप में काम कर रहा था।साथ ही मै अपने अधूरे सपनों की कसक को अपने शब्दों में ढ़ाल कर कुछ लिखने की कोशिश भी कर रहा था।जिसने मेरे सृजन में "मेरे बाद" व "तुम्हारे बाद" की नींव रखी।मेरे अधूरे सपनों ने मुझे ताकत दिया अपने मँजिल को प्राप्त करने का और मै कुछ खाश रातों के सुहाने सपनों की यादों को दिल में सजाये जीता रहा..........किसी के ना होने पर भी हरदम किसी के साथ........ऐसे है मेरे अधूरे सपने.....एक युवामन के अंतरमन के उद्गार और उसकी मुस्कुराहटों के पीछे दबे किसी कसक की टीस से................।




9 टिप्‍पणियां:

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

सत्यम अभी उम्र पड़ी हैं ........हर सपना पूरा होगा

Neelima ने कहा…

अभी उम्र ही क्या हैं आपकी ? अभी तो रास्ता भी सामने हैं मंजिल की तरफ बढने का हौसला बनाये रखो इश्वेर ने कुछ न कुछ अच्छा आपके लिय जरुर संजो कर रखा होगा बस मन मे यही विश्वास रखो हमारी शुभकामनाये

वन्दना ने कहा…

सत्यम उम्र के इस दौर मे अक्सर ऐसा हो जाता है और ये ही आखिरी मंज़िल नहीं शायद इससे कुछ ज्यादा बेहतर तुम्हारे लिये अभी बचा है बस वक्त आने की देर है इसलिये हौसला रखो और नये उत्साह से जीवन जीयो और जो बीत गया उसे बिसार दो।

Roshi ने कहा…

satyam.jab ishwar ek darvaza band karta hai to 4 kholta hai ......iswar per bharosa rakho

Rajesh Kumari ने कहा…

पहले थोडा बहुत जानती थी आपके बारे में आज बहुत कुछ जान लिया इसका पूरा श्रेय आदरणीया रेखा जी को जाता है उन्हें बहुत बहुत आभार |और प्रिय सत्यम आपको बस इतना कहना चाहती हूँ की एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा भगवान् खोल देता है मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करो और आगे देखो और जो दुःख दे मुड़कर पीछे नहीं देखो एक बार ऐसा ही कुछ लिखा था मैंने ---अब तो दिल के सब गम भुला दूँगी मैं ,देखा जो मुडके पीछे तो खुद को सजा दूंगी मैं |

Ragini ने कहा…

''बीती ताहि, बिसारी देय.....आगे की सुध लेय''.......God bless you!!

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

विगत सपने को भुला कर जाग जाइये.सच सामने खड़ा है,और उसे सपने से भी सुन्दर बनाने की सामर्थ्य है आपमें !

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

himmat-e-mardan
madad-e-khuda...

Sushil Shail ने कहा…

Ek Achhi Kahani Rachna Ka Jikra Aapke Dwara. Is Tarah Ki Rachnayen Badi Hi Rochak Hoti Hai.

Thank You For Sharing. Padhe प्यार की बात, Hindi Love Story aur Bahut Kuch Online.